सुनलो साधू बाणी
सुनलो साधुबाणी
माँ बोली तुम आओ बेटा
सुनलो साधू बाणी
स्थिर मनमें सुनलो अब ये
जिबनकी कहानी II
खानापीना घूमना फिरना
ये न्ज्हीं है जीबन
इतर प्राणी भी ये करते
केवल नाहोता जुबान II
जीबन जीना बड़ा आसान
जब कोई मानता नियम
जहां होजाए ब्यातिक्रम
दुर्बह बनता जीबन II
जिबनका होता कर्म आधार
कर्मसे मिलता फल
कर्म सही तो सबकुछ सही
बेहतर निश्चित कल II
जो हम करते जो हम करते
लौटकर आता अक्सर
चाहे कियूं नाहो इज्ज़त
सम्मान
सहौरत धोखा बनकर II
इसलिए मेरी जानकी तुकुडा
याद ये हमेसा रखलो
चाहे स्थिति फिर कैसा कियूं
नाहो
अछा कामही करलो II

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